पश्चिम बंगाल:-मछुआरे को मिली 800 किलो की दुर्लभ मछली, रातो रात हो गया मालामाल

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West Bengal: पश्चिम बंगाल में एक मछुआरा मछली पकड़कर अपना गुजारा करता था. लेकिन कहते हैं न देने वाला जब देता है तो छप्पर फाड़कर देता है. ऐसा ही इस मछुआरे के साथ हुआ. पश्चिम बंगाल के दिघा में मछुआरे ने एक विशाल काले रंग की दुर्लभ प्रजाति की मछली पकड़ी. आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि इस मछली का वजन 800 किलोग्राम के करीब है.

यह मछली एक बहुत ही दुर्लभ प्रजाति की मछली है. देखने में यह किसी फ्लाइंग शिप की तरह लग रही है. काफी पुराने लोगों ने बताया कि इस इलाके में इससे पहले ऐसी मछली कभी भी नहीं देखी गई. एक बार फिर आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि जब मछुआरे ने यह मछली बेची तो उसे बीस लाख रुपये मिले.

इस दुर्लभ प्रजाति की मछली का नाम चिलशंकर फिश बताया जा रहा है.

विशाल काले रंग की यह मछली सोमवार को मछुआरे के पकड़ में आई. पश्चिम बंगाल के दिघा में एक ट्रॉलर से यह 780 किलोग्राम की मछली पकड़ी गई. इस बड़ी मछली को पकड़कर मछुआरा काफी खुश था.

इससे पहले जहां वह किसी तरह अपना और अपने परिवार का पेट पालता था, इस मछली को पकड़कर वह रातों-रात 20 लाख का आदमी बन गया. इस मछली की जब बाजार में बोली लगाई गई तो इसका प्रतिकिलो का भाव 2100 रुपये लगाया गया. इस हिसाब से मछली कुल बीस लाख रुपये में बिकी. इस तरह यह मछली पकड़ना उसके लिए किसी लॉटरी की तरह साबित हुआ.

मछुआरे ने बताया कि जिस ट्रॉलर से मछली पकड़ में आई है, उसका मालिक ओडिशा का रहने वाला है. 780 किलो की मछली दिघा में पकड़ी गई तो इस अजीबो-गरीब मछली को देखने के लिए लोकल टूरिस्ट की भीड़ इकट्ठा हो गई. भारी होने के चलते यह मछली कोई हरकत भी नहीं कर पा रही थी.

मछली विशेषज्ञों का कहना है कि चिलशंकर फिश के तेल और हड्डियों से दवाई बनाई जाती है. इसके अलावा उसके शरीर का बाकी का हिस्सा मॉनसून में खाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है.

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