सुशांत केस: NDPS एक्ट की इन धाराओं के तहत हुई है रिया की गिरफ्तारी, जाने इसमें क्या है सजा…

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नई दिल्ली। एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushnat Singh Rajput Case) की मौत के मामले में सीबीआई (CBI) और एनसीबी (NCB) की ओर से तेज कार्रवाई के बाद ड्राइंग्स एंगल मामले में मामले की मुख्य आरोपी रिया चक्रवर्ती (Riya Chakarwarty) की गिरफ्तारी की गई है।

ड्रग्स कनेक्शन के चलते ही रिया चक्रवर्ती को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8 से 20 (बी), 27, 28 और 29 के तहत गिरफ्तार किया गया है। सुशांत के मामले में रिया से पहले एनसीबी की टीम ने उनके भाई शोभित चक्रवर्ती और सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा को भी गिरफ्तार किया था। आइए जानते हैं कि एनसीबी ने जिन धाराओं के तहत रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी की है उसके क्या प्रावधान है।

एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20
इस धारा के तहत नशीले पदार्थ की खेती करने, बनाने, पैदा करने, बेचने, रखने, खरीदने, लेनदेन करने, अंतर राज्य स्तर पर आयात निर्यात या उपयोग करने पर सजा दी जाती है।

इस धारा के तहत अगर किसी व्यक्ति के पास छोटी मात्रा में नशीला पदार्थ पाया जाए तो उसे 6 महीने तक की जेल या जुर्माना हो सकता है। साथ ही सश्रम कारावास की सजा हो सकती है, वहीं इसमें आर्थिक जुर्माना 10 हजार तक है।

अगर कोई व्यक्ति भांग-गांजा के साथ पकड़ा जाता है जो वाणिज्यिक मात्रा की तुलना में कम है, लेकिन छोटी मात्रा से ज्यादा है तो ऐसी स्थिति में धारा 20 (ii) के अनुसार 10 साल कारावास बढ़ाया जा सकता है साथ ही आर्थिक जुर्माना एक लाख तक बढ़ सकता है।

वहीं अगर बरामद किए गए गांजा-भांग वाणिज्यिक स्तर में है तो सजा के तौर पर दोषी को सश्रम कारावास की सजा हो सकती है जिसमें 10 साल से कम की सजा नहीं होती लेकिन इसे 20 साल तक आगे बढ़ाया जा सकता है। वहीं कम से कम एक लाख रुपए और अधिकतम 2 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 धारा 8 क
इस धारा के तहत जो व्यक्ति किसी संपत्ति के बारे में यह जानते हुए कि वह संपत्ति भारत या किसी अन्य देश में किए गए अपराध में भाग लेने की एवज में प्राप्त की गई है, उस संपत्ति के अवैध मूल को छिपाने या किसी अपराध में किसी व्यक्ति की सहायता से करने के लिए या कानूनी नतीजों से बचने के लिए किसी भी संपत्ति को परिवर्तित,स्थानांतरित करने वाला दोषी माना जाता है।

ऐसे स्थिति में व्यक्ति किसी संपत्ति को ना छुपाएगा और ना ही उसके वास्तविक रूप, स्वभाव को बदल सकता है। संपत्ति का ना ही अधिग्रहण करेगा ना ही कब्जे में रखेगा और ना ही उपयोग करेगा।

अगर कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि वह संपत्ति भारत या किसी अन्य देश में किए गए अपराध में भाग लेने की ऐवज में प्राप्त की गई है।

ऐसे में उपरोक्त धाराओं के तहत कारावास का प्रावधान है जो कम से कम 3 साल और अधिक से अधिकतम 10 साल तक हो सकता है, साथ ही दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

एनडीपीएस एक्ट की धारा 29
इस धारा के तहत उकसाने और अपराधिक षड्यंत्र के लिए दोषी को सजा मिलती है। वहीं इस एक्ट की उपधारा 2 के तहत जो व्यक्ति किसी अपराध के लिए उक्त आएगा या किसी अपराध करने का षड्यंत्र का पक्षकार होगा, जो भारत या भारत से बाहर और अगर किसी स्थान से यह सब करेगा तो वह दोषी माना जाएगा।

एनडीपीएस एक्ट की धारा 28
इस धारा के तहत अपराध करने का प्रयास करने पर सजा दी जाती है जो कोई भी इस अधिनियम के तहत अपराध करने का अपराध करता है या प्रयास करता है तो ऐसे में वह व्यक्ति उपबंधित दंड का हकदार होगा।

 

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