ओडिशा: महानदी में आई बाढ़, 17 लोगों की मौत, लाखों प्रभावित

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छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में हुई तेज़ बारिश के कारण ओडिशा के कई इलाक़े बाढ़ के पानी में डूब गए हैं.

महानदी के साथ-साथ अन्य कई नदियां उफ़ान पर हैं जिस कारण राज्य के 20 ज़िले प्रभावित हुए हैं. कटक, जाजपुर, केंद्रपड़ा, खोर्धा, पूरी और भद्रक ज़िलों में स्थिति ज़्यादा गंभीर है.

राज्य सरकार के मुताबिक़, बाढ़ की वजह से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है. यही नहीं, खेतों में खड़ी फसल को भी नुक़सान पहुंचा है.

लाखों लोग बाढ़ के कारण प्रभावित हुए हैं. कुछ जगहों पर लोगों के पास पीने के लिए साफ़ पानी और खाने के लिए अनाज तक नहीं है.

जान बचाने के लिए कई परिवार मकान की छत पर, नदियों के बांध पर या फिर राहत शिविरों में रह रहे हैं.

प्रशासन से नाराज़गी

जगतसिंपुर ज़िले के जिल्लानसी गांव में रहने वाली प्रभाती बेहेरा अपना घर खो चुकी हैं. बाढ़ में उनका घर डूब गया है. प्रभाती ने बीबीसी को कहा, “घर में जो था, पानी में बह गया. न पीने का पानी है, न खाने का सामान. हम अभी पड़ोस के एक घर के छत पर रह रहे हैं. प्रशासन से कोई सहायता अभी तक नहीं पहुंची है.”

महानदी के अलावा सुबर्णरेखा, बुढाबलंग, बैतरणी और ब्राह्मणी नदी में भी बाढ़ आ गई है. महानदी से निकली काठजोड़ी, देवी, पाइका नदियों में पानी कई जगहों पर ख़तरे के निशान से ऊपर बह रहा है.

हीराकुंड बांध से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ना पड़ रहा है. राज्य सरकार के प्रमुख शासन सचिव असित त्रिपाठी ने वीडियो जारी करके कहा है, “छत्तीसगढ़ और ओडिशा के विभिन्न इलाकों में हुई तेज़ बारिश के बाद महानदी के हीराकुंड डैम में 9.11 लाख क्यूसेक पानी आ गया था. इसलिए, डैम से 46 गेटों के ज़रिये 7.65 लाख क्यूसेक पानी निकालना पड़ा है.”

त्रिपाठी ने बताया कि पानी छोड़े जाने के कारण अगले 24 घंटों में कटक, पुरी, जाजपुर, जगतसिंपुर और केंद्रपड़ा ज़िलों के लो लाइन इलाक़ों पर असर पड़ेगा. हालांकि, उनका कहना था कि सरकार स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं.

कितना नुक़सान हुआ है?

ओडिशा सरकार के स्वतंत्र राहत आयुक्त प्रदीप कुमार जेना ने रविवार शाम को पत्रकारों से कहा, “इस बाढ़ में 3,256 गांव प्रभावित हुए हैं. 340 गांवों से यातायात संपर्क पूरी तरह टूट गया है. 107 सड़कों के ऊपर पानी बह रहा है. ढाई लाख से ज्यादा लोग पानी से घिरे हुए हैं.”

राज्य सरकार की तरफ़ से राहत और बचाव कार्य भी शुरू हो गया है. 254 नावों को इस काम में लगाया गया है. एनडीआरएफ़ की 14, एसडीआरएफ़ की 17 और अग्निशमन विभाग की 22 टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हैं.

इसके अलावा, 45 मोबाइल मेडिकल टीम और 42 पशु चिकित्सा दल भी बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में काम कर रहे हैं.

बाढ़ प्रभावित इलाकों में सरकार खाने का सामान पहुंचाने की भी कोशिश कर रही है. सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक़, रविवार शाम तक 357 फ्री किचन खोले गए हैं जहां 57 हज़ार लोगों को खाना दिया गया है.

जाजपुर में राहत और बचाव कार्य में लगे एनडीआरएफ़ टीम की मुख्य असिस्टेंट कमांडेंट सुरजीत सिंह ने बीबीसी को बताया, “फंसे हुए लोगों को सुरक्षित जगह तक पहुंचाने और लोगों के पास खाना पहुंचाने का काम किया जा रहा है. इसके अलावा मरीज़ों और गर्भवती महिलाओं को हॉस्पिटल पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है. कई जगहों से लोगों को सांप काटने की ख़बर भी आ रही है. हम उन जगहों पर जाकर भी रेस्क्यू कर रहे हैं.”

फसलों को भी नुक़सान

इस बाढ़ में फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुंचा है. स्वतंत्र राहत आयुक्त प्रदीप कुमार जेना ने कहा कि प्राथमिक आकलनों के अनुसार, 1,68,904 हेक्टेयर ज़मीन पानी में डूबी है. इस तरह से सैकड़ों किसान अपनी फसल खो चुके हैं.

बाढ़ प्रभावित जगतसिंपुर ज़िले के सहाराडीआ गांव के रमेश बेहेरा ने बीबीसी से कहा, “10 एकड़ ज़मीन में मैंने धान और सब्ज़ी की खेती की थी. पूरी फसल के ऊपर अब 5 फुट का पानी बह रहा है. लोन लेकर मैंने खेती की थी. मेरा सबकुछ पानी में चला गया. मैं बर्बाद हो गया.”

ओडिशा में आई बाढ़ में 14 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. कोरोना संक्रमण के समय बाढ़ का कहर लोगों पर भारी पड़ रहा है.

इस बीच, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सोमवार को बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का दौरा करने जा रहे हैं.

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