जानिए क्यों हरेली में घर के द्वार पर लगाते हैं नीम की टहनी….

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रायपुर। प्रदेश में सदियों से चली आ रही ऐतिहासिक और पारंपरिक पर्व हरेली 20 जुलाई को है। इस दिन हर घर के मुख्य द्वार पर नीम की टहनी लगाने की परंपरा है। जानकारों की माने तो बारिश के मौसम में छोटे-छोटे कीटाणु, जीवाणुओं के प्रकोप को घर के भीतर जाने से रोकने के लिए नीम की टहनी लगानी चाहिए। वहीं गांवों में अंधविश्वास है कि नीम की टहनी लगाने से घर-परिवार और सदस्यों को बुरी नजर नहीं लगती। ग्रामीणों का मानना है कि हरेली अमावस्या पर बुरी आत्माएं परेशान करती हैं। गांव के ओझा, बैगा, गुनिया आदि गांव को बुरी आत्माओं से बचाने के लिए मंत्र, झाड़-फूंक करते हैं और हर घर में नीम की टहनी लगाते हैं। साथ ही दीवार पर गोबर से पुतला-पुतली का चित्र भी बनाते हैं। साथ ही इस दिन किसान खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले कृषि औजारों, हल, हंसिया, कुल्हाड़ी, रापा, धमेला आदि की पूजा-अर्चना करते हैं। हल जोतने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बैलों का आकर्षक श्रृंगार करते है। ग्रामीण अंचलों में बांस से बनी गेड़ी पर चढ़ने का आनंद लेने के साथ ग्रामीण खेल फुगड़ी, खो-खो, कबड्डी, बिल्लस आदि का आयोजन किया जाता है।

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