IND vs AUS वो 5 कारन, जिनकी वजह से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की जीत महान हो जाती है।

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नई दिल्ली, Ind vs Aus: भारतीय टीम के खिलाड़ी आइपीएल 2020 में भाग लेने के बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रवाना हुए थे, जहां दोनों देशों के बीच तीनों फॉर्मेट की सीरीज खेली गई, लेकिन सबसे ज्यादा निगाहें टेस्ट सीरीज पर थीं। आइसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के तहत खेली गई बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारतीय टीम ने जीत हासिल की। इस टेस्ट सीरीज को भारत ने पहला मुकाबला हारने के बावजूद 2-1 से अपने नाम किया। अब इस टेस्ट सीरीज से जुड़े उन 5 कारणों के बारे में जान लीजिए, जिनकी वजह से ये भारत की महान जीत रही।

हार से मिली ‘जीत की सीख’

भारतीय टीम चार मैचों की टेस्ट सीरीज में हार से आगाज करना पड़ा था।

पिंक बॉल से कभी भी टेस्ट मैच नहीं हारने वाली टीम ने फिर से एक बार अपना विजयी अभियान जारी रखा और भारत को 8 विकेट से हरा दिया था। पिंक बॉल टेस्ट मैच में भारत के लिए सबसे निराश पल था, जब टीम सिर्फ 36 रन पर ढेर हो गई थी। इसके बाद टीम ने सीरीज में जो वापसी की, उसके वजह से ये सीरीज भारतीय टीम के लिए महान जीत में शुमार हो गई, क्योंकि हारने के बाद जीत के साथ वापसी करना वाकई में मुश्किल होता है। खासकर जब आप पहले मैच में 36 रन पर ऑल आउट हो गए हों।

स्मिथ और वार्नर की वापसी

भारत ने जब 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया की सरजमीं पर पहली टेस्ट सीरीज जीती थी तो उस समय कहा जा रहा था कि स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर टीम का हिस्सा नहीं थे। इस वजह से भारतीय टीम ने सीरीज 2-1 से जीत ली। बैन के कारण स्मिथ और वार्नर उस सीरीज में नहीं खेल पाए थे, लेकिन इस बार स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर दोनों ही खिलाड़ी थे, बावजूद इसके भारत ने 2-1 से सीरीज में जीत हासिल की। इस वजह से भी ये टेस्ट सीरीज में मिली जीत भारत के लिए विशाल बन जाती है। हालांकि, वार्नर चोट के कारण सिर्फ दो ही मैच खेल पाए थे और स्मिथ ने शतक जड़ा था।

विराट कोहली नहीं थे साथ

भारतीय टीम की टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा और कप्तान विराट कोहली के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन विराट कोहली सिर्फ एक मैच खेलने के बाद ऑस्ट्रेलिया से वापस आ गए थे। पितृत्व अवकाश पर जाने से पहले विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने पहला टेस्ट खेला था। उस टेस्ट मैच में हार मिली थी। यहां तक कि बाकी के तीन मैचों में भारत का बल्लेबाजी क्रम उतना अच्छा नहीं रहा था, लेकिन अजिंक्य रहाणे की अगुवाई वाली टीम ने दिखा दिया कि बिना विराट कोहली के भी ऑस्ट्रेलिया को चारों खाने चित किया जा सकता है। भारत को रोना रोना नहीं आता।

गेंदबाज और ऑलराउंडर हो गए चोटिल

सीरीज से पहले इशांत शर्मा, पहले मैच में मोहम्मद शमी, दूसरे मैच में उमेश यादव, तीसरे मैच में रवींद्र जडेजा, आर अश्विन और जसप्रीत बुमराह चोटिल हो गए थे और जडेजा के अलावा कोई विशुद्ध ऑलराउंडर टीम के पास नहीं था, लेकिन फिर भी भारत ने आखिरी के तीन में से दो मुकाबले जीतकर ऑस्ट्रेलिया को ये दिखा दिया कि उनके युवा खिलाड़ी भी ऑस्ट्रेलिया के महान गेंदबाजों को मात दे सकते हैं। भारत के पास तीसरा टेस्ट भी जीतने का मौका था, लेकिन कई खिलाड़ी चोटिल हो गए थे। ऐसे में भारत ने चार सत्र बल्लेबाजी की और 5 विकेट रहते मैच को ड्रॉ कराया था।

तोड़ दिया गाबा का घमंड

भारतीय टीम ने जब क्वारंटाइन नियमों के कारण ब्रिसबेन जाने से मना किया था तो उस समय ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ियों ने कहा था कि भारतीय टीम डर के कारण गाबा में खेलना नहीं चाहती, क्योंकि भारत को कभी भी गाबा के मैदान पर जीत नहीं मिली है और ऑस्ट्रेलिया 32 साल से ब्रिसबेन में एक भी टेस्ट मैच नहीं हारी है, लेकिन भारतीय टीम के युवा खिलाड़ियों ने ही ऑस्ट्रेलियाई टीम के गाबा का घमंड चकनाचूर कर दिया। भारत के पास आखिरी मैच के लिए कोई भी ऐसा गेंदबाज नहीं था, जिसके पास 5 मैचों का भी अनुभव हो, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पास 100-100 मैचों के अनुभव वाले गेंदबाज थे।

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