केंद्र सरकार ने दी फेस मास्क और पीपीई बनाने में इस्तेमाल होने वाले खास कपड़ों के निर्यात को छूट।

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) ने कोरोना संकट के बीच फेस मास्क (Face Mask) और निजी सुरक्षा किट (PPE Kits) बनाने में इस्तेमाल होने वाले खास तरह के बिना बुने कपड़ों (Non-Woven Fabric) के निर्यात (Export) की मंजूरी दे दी है. हालांकि, किसी भी ग्राम प्रति वर्गमीटर (GSM) की बारीकी वाले मेल्ट ब्लोन कपड़ों (Melt Blown Fabric) के निर्यात पर पाबंदी रहेगी. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने मंगलवार को एक अधिसूचना में कहा कि कपड़ा निर्यात के संबंध में जारी 13 जुलाई की अधिसूचना को संशोधित किया गया है.

मेल्‍ट ब्‍लोन कपड़े के निर्यात पर अब भी जारी रहेगी पाबंदी
विदेश व्यापार महानिदेशालय ने कहा है कि अब सिर्फ मेल्ट ब्लोन (किसी भी जीएसएम मानक के) कपड़े के निर्यात पर प्रतिबंध रहेगा.वहीं, 25 से 70 जीएसएम वाले बिना बुने कपड़ों के निर्यात की अनुमति होगी. बता दें कि कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में पीपीई किट्स और मास्‍क को अहम हथियार माना गया. मार्च में भारत के पास पर्याप्‍त मात्रा में मास्‍क और पीपीई किट्स उपलब्‍ध नहीं थीं. इसको देखते हुए इन्‍‍हें बनाने में इस्‍तेमाल होने वाले खास फैब्रिक के एक्सपोर्ट पर पाबंदी (Export Restrictions) लगाई गई थी. केंद्र सरकार (Central Government) ने देश में दिनरात पीपीई किट्स और मास्‍क का उत्‍पादन शुरू करवा दिया था.

देश में पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्‍ध हैं मास्‍क और पीपीई किट
देश में अब जरूरत के मुताबिक पर्याप्‍त मास्‍क और पीपीई किट्स उपलब्‍ध हैं. ऐसे में सरकार ने इन्‍हें बनाने में इस्‍तेमाल होने वाले खास कपड़े के निर्यात से पाबंदी हटा दी है. साथ ही 25-70 GSM non woven fabrics के एक्सपोर्ट पर पाबंदी भी हटा दी गई है. बता दें कि मई मध्‍य में सीमाशुल्क अधिकारियों ने दिल्‍ली एयरपोर्ट के मालवहन टर्मिनल पर सैनिटाइजर, पीपीई किट्स, मास्क और इसके कच्चे माल की बड़ी खेप जब्त की थी. इन्हें अवैध तरीके से विदेश भेजा जा रहा था. सीमा शुल्क अधिकारियों ने बताया था कि इन उत्पादों को परिधान, बच्चों के कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन सामग्री और पाउच की पैकिंग सामग्री के रूप में दिखाया गया था ताकि इन्हें विभाग की नजरों से बचाया जा सके.

क्‍यों खास होते हैं पीपीई किट्स और मास्‍क का फैब्रिक
पीपीई किट्स में इस्‍तेमाल होने वाला कपड़ा खास तरह का उन्नत सुरक्षात्मक फैब्रिक होता है. इसके लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से कड़ी तकनीकी आवश्यकताओं के पालन करने का निर्देश दिया गया था. इस कपड़े में फ्लूयड पार नहीं होता पाता है. वहीं, इसके फटने की आशंका भी काफी कम रहती है. दरअसल, किसी के छींकने या खांसने या रक्‍त के कपड़े पर लगने पर अगर फ्लूयड अंदर चला जाता है तो पहनने वाले व्‍यक्ति को कोरोना संक्रमित कर सकता है. इसलिए पीपीई किट्स और मास्‍क बनाने वाले फैब्रिक को खास तरह से बनाया जाता है.

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